न्यूमोनिया सांस से जुड़ी एक गंभीर बीमारी ठंड के मौसम मे रखे बच्चों का खास ख्याल |

श्री अब्दुल अज़ीज़, वरिष्ठ संपादक (लेखक नेशन न्यूज इंडिया के मुख्य संपादक हैं और निरंतर 40 वर्षो से पत्रकारिता की मुख्यधारा में कार्य कर रहे हैं | )

न्यूमोनिया सांस की एक गंभीर बीमारी है, जो बच्चों मे सर्दी-जुखाम का संक्रमण फेफड़ों मे पहुँच जाने से होती है | न्यूमोनिया का प्रथम लक्षण ‘सांस तेज चलना’ है जिसका तुरंत उपचार न किया जाय तो गंभीर निमोनिया के लक्षण उत्पन्न हो सकते हैं |

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट 2014 के अनुसार 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों मे 17 प्रतिशत मृत्यु न्यूमोनिया के कारण होती है |

जनपद बहराइच मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ सोमनाथ मौर्या ने बताया पाँच वर्ष से कम उम्र के बच्चों मे “तेज सांस” न्यूमोनिया का शुरुवाती लक्षण हैं | ऐसे बच्चे देखने मे सामान्य बच्चों की तरह ही दिखते हैं परंतु तत्काल उपचार न मिलने की दशा मे इनकी स्थिति गंभीर हो जाती है | बीमारी की गंभीर अवस्था मे शिशु स्तनपान करना छोड़ देते हैं या कुछ भी खाने पीने मे असमर्थ हो जाते हैं | साँसों मे घरघराहट की आवाज अथवा बीमारी अधिक गंभीर होने पर बच्चा सुस्त अथवा बेहोश हो सकता है | उन्होने बताया मेडिकल कॉलेज के चिल्ड्रेन वार्ड मे न्यूमोनिया से पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ रही है | डॉक्टर ने बताया बच्चे को सांस लेने मे तकलीफ अथवा तेज सांस होने पर तुरंत चिकित्सीय सलाह लेकर गंभीर न्यूमोनिया से बचा जा सकता है |

बहराइच मेडिकल कॉलेज चिल्ड्रेन वार्ड मे कार्यरत स्टाफ नर्स ने बताया पिछले महीने न्यूमोनिया से पीड़ित 175 बच्चे भर्ती हुये थे जिसमे उपचार के दौरान 1 बच्चों की मृत्यु हो गयी | जबकि माह दिसंबर मे अब तक न्यूमोनिया से ग्रसित 117 बच्चे भर्ती हो चुके हैं |

प्रदेश मे शिशु मृत्यु दर घटाने हेतु मिशन निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारी को “न्यूमोनिया कार्यक्रम” के संचालन हेतु दिशा निर्देश भी जारी किया है | जिसके अनुसार एक हज़ार की जनसंख्या मे 5 साल की आयु तक के प्रति वर्ष लगभग 40 से 60 न्यूमोनिया एवं खांसी जुखाम के बच्चे पाये जायेंगे | यानि प्रत्येक माह 3 से 5 न्यूमोनिया से पीड़ित बच्चे एक आशा क्षेत्र मे मिलेंगे | सर्दी के मौसम मे इनकी संख्या बढ़ भी सकती है | जारी दिशा निर्देश मे कहा गया है कि प्रत्येक बच्चा जिसे सर्दी / जुखाम अथवा सांस लेने मे परेशानी हो उसका स्वास्थ्य कार्यकर्ता द्वारा न्यूमोनिया के अन्य गंभीर लक्षणों हेतु जांच की जाय और उसका उचित उपचार किया जाय |

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ सुरेश सिंह ने बताया एचबीएनसी कार्यक्रम तहत प्रशिक्षित आशाएँ गृह भ्रमण के दौरान बीमार शिशुओं मे खतरे के लक्षणों की जांच करती हैं | आवश्यकता पड़ने पर उन्हे नजदीकी स्वास्थ्य इकाई पर संदर्भित भी करती हैं | न्यूमोनिया से बचाव हेतु टीकाकरण भी कराया जा रहा है |

तेज सांस –

जन्म से 2 माह के शिशु यदि 1 मिनट मे 60 या 60 से अधिक सांस लेते हैं तो उनकी सांस तेज है वहीं 2 माह से 12 माह के शिशुओं मे 50 या 50 से अधिक सांस तेज है तथा 12 माह से 5 साल तक के बच्चों मे 1 मिनट मे ली गयी 40 या 40 से अधिक सांस तेज सांस है |

उपाय –

 6 माह तक केवल स्तनपान कराना, ऊपर से कुछ भी न देना |

 बच्चों को सभी टीके लगवाना

 हाथों की सफाई रखना

 स्वच्छ पेय जल एव आस पास साफ सफाई रखना |

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