बिहार उपचुनाव का परिणाम अब बीजेपी को सताने लगा है।

बैठक करते हुए बीजेपी अध्यक्ष

दिलशाद अहमद , संपादक बिहार

पटना : बिहार में पांच विधानसभा और एक लोक सभा पर उपचुनाव हुआ था।
बिहार उप चुनाव का चुनावी परिणाम अब बीजेपी को सताने लगा है।
भारतीय जनता पार्टी चाहती है कि बिहार के उप चुनाव में हार की समीक्ष होनी चाहिय।

बीजेपी बिहार अध्यक्ष ड़ा संजय जयसवाल बिहार प्रदेश कार्यालय पटना में बैठक किए हुए थे उसी दौरान उनके द्वारा कहा गया कि जनता ने जो अपना निर्णय दिया है। उस पर हम सभी को विचार करनी चाहिए।डा. संजय का यह भी कहना कि जो कमियां रह गयी हैं उसे हम ठीक करेंगे।
आपको बता दें कि भजपा पांच विधान सभा उप चुनाव में सिर्फ एक विधान सभा पर चुनावी मैदान में थी ।
भाजपा किशनगंज सीट पर चुनाव लड़ी थी जहां दस हज़ार वोट के अंतर से भाजपा
प्रत्याशी की हार हो गई। उसी पर ड़ा. संजय जयसवाल का कहना था कि इस बार हार के बावजूद जितना वोट आया वो वहां के चुनावी इतिहास में भाजपा को नहीं
मिला था, लेकिन उस इलाक़े के सामाजिक समीकरण पक्ष में ना रहने के कारण हार हुई, लेकिन अगली बार उम्मीद है कि जीत हमारी ही होगी।

डा. संजय जैसवाल ने बिहार उपचुनाव में किशनगंज विधानसभा के सभी कार्यकर्ताओं को आभार करते हुय कहा कि सभी बूथ कार्यकर्ताओं ने काफी
मेहनत की । किशनगंज का सामाजिक समीकरण ही कुछ ऐसा है कि परिणाम हमारे पक्ष में नहीं आ सका । लेकिन मैं 1 महीने के भीतर किशनगंज अपने सभी
कार्यकर्ताओं को और बूथ अध्यक्षों को धन्यवाद देने जरूर जाऊंगा।
उन्होंने आगे कहा कि बिहार का उप चुनाव हमें अपने कार्यशैली के बारे में पुनः आकलन करने की जरूरत को बताता है । आज भी लोकसभा के परिणाम उसी तरह हुए जैसे 4 महीना पहले थे । लेकिन विधानसभा के चुनाव का नतीजा बिल्कुल अलग है और इसे ठंडे बस्ते में डालने की नहीं बल्कि क्या कमी रह गई उस पर
ध्यान देने की जरूरत है।
उपचुनाव तो उत्तर प्रदेश में भी हुए और वहां एनडीए 80% सीटें जीतने में सफल हुई ।

फिर बिहार में ऐसा क्या हुआ कि जिनके समय में 5:00 बजे शाम के बाद घर से बाहर कोई व्यक्ति नहीं निकलता था वह भी दो स्थानों पर जीत गए।
आज का युवा 2005 के पहले के हालात को देखा भी नहीं है । वह यह जानता नहीं है कि 15 वर्षों के लालू राबड़ी शासन के बाद 2005 में बिहार फिर से 1947
के बिहार की स्थिति में पहुंच गया था। एनडीए के शासन में आज बिहार विकास की ओर अग्रसर है पर उसकी कल्पना में दूसरे राज्यों के मुकाबले बिहार की
तुलना है।
दरौंदा उपचुनाव महज भाजपा कार्यकर्ताओं का विद्रोह नही था बल्कि भाजपा और जदयू कार्यकर्ताओं का विद्रोह था । अगर हम बेलहर में समझाने में सफल नहीं
होते तो वहां भी नतीजा कुछ ऐसा ही होता।
आज भी गोपालगंज में जदयू के पूर्व विधायक सरकारी भ्रष्टाचार के खिलाफ धरने पर बैठते हैं। अगर यही कार्य भाजपा के किसी पूर्व विधायक ने किया
होता तो मुझ पर उसके निष्कासन का दबाव होता।
2010 में हम तीन चौथाई से ज्यादा बहुमत प्राप्त करने में सफल हुए थे ।
इसके अनेकों कारण है पर जो सबसे महत्वपूर्ण कारण था उसमें

पहला

बिहार की कानून व्यवस्था भारत में उस समय सर्वश्रेष्ठ था।

दूसरा
प्रत्येक प्रखंड में भाजपा और जदयू कार्यकर्ताओं की हिस्सेदारी थी जिससे
प्रशासन मे नीचे के स्तर पर आम जनता का काम हो जाता था ।
आज इन दोनों मसलों पर आत्म विवेचना की जरूरत है

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